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Showing posts from November, 2020

कविता

* संगी आतो गांवे म * ------------------------------- संगी आतो गांवे म,खेलब आज होली । तन सिंगारे हे बसंत,निक लगे मीठ बोली।। रिगबिग दिखे गली खोर,रंगीन दिखे बाग़ । मन बैरी ह झूमें हे, कोयली धरे हे राग ।। लईका सियानी सबो ,धरे हे पिचकारी। पनिहारिन के गोठ हे ,करे जम के चारी।। गली खोर फ़ाग गूँजे, लइका बूढ़ा संग। हाँथ म पिचकारी धरे,लाली पिवरा रंग।। ज्वाला प्रसाद कश्यप ( शिक्षक) भठली कला,झझपुरी खुर्द मुंगेली 8770734890

झड़ी होगय

बिन बादर के झड़ी होगय। करगा निकल गे,धान ह तरी होगय ।। गंगा निरमल गंगा,आज मतलागे, बोतल के पानी फरी होगय।। गाय के सजा होगय,बघवा संग लड़ई मा, बघवा सबो ड़हर ले बरी होगय।। टंगिया तलवार के लड़ई म,हंवव गवाही, कति बोलंव बीच म मोर नरी होगय।। सुखाए रुख ल हरियर करेंव पानी डार के, तेखर सेती हाँथ म हंथखड़ी होगय।। ज्वाला प्रसाद कश्यप (शिक्षक L.B.) भठली कला ,मुंगेली छ,ग, 8770734890,7566498583

बिन बदर

छत्तीसगढ़ी कविता   *  ओखरे शरण मा   * ओखरे शरण मा जाके पूछव,                  जेन ह जग ला पालत हे। मोर तीर झन आके पूछव,                काबर धरती हालत हे।। टोपा  बांध के बइठे हे,     ...

बिन बादर के

छत्तीसगढ़ी कविता   *  ओखरे शरण मा   * ओखरे शरण मा जाके पूछव,                  जेन ह जग ला पालत हे। मोर तीर झन आके पूछव,                काबर धरती हालत हे।। टोपा  बांध के बइठे हे,     ...

काबर धरती

छत्तीसगढ़ी कविता   *  ओखरे शरण मा   * ओखरे शरण मा जाके पूछव,                  जेन ह जग ला पालत हे। मोर तीर झन आके पूछव,                काबर धरती हालत हे।। टोपा  बांध के बइठे हे,     ...

छ.ग.कविता

छत्तीसगढ़ी कविता ------------------------------------ धरती के छाती म जनम ले हँव, मोर भार ह एला हरू हावय। ए करिया बादर बता ना,  तोला काबर  गरू  हावय।। -करथे ए हमला दुलार, दे हावय जग ला जनम। का जानबे तै बाँझ बैरी,...

ज्वाला के दोहे

*दोहा छन्द* दरशन करले हाथ के,एमा चारो धाम। करिया धंधा छोड़ के,करले उज्जर काम।। (1) कांटा के का दोष हे,दोषी हावय पाँव। आस करे तै फूल के,छोड़े अपने छाँव।। (2) *चौपाई छन्द* *राम महिमा* राम न...

छंद

*श्री हनुमान जी वंदना* जयकारी/चौपई छंद ------------------------------ नती सुनले नाथ हमार। संकट मोचन पवन कुमार।। बंदन हे बंदन हे रंग। चुपरे बंदन पूरा अंग।। (01) ---------------------------------- आके रख भक्तन के लाज। करे राम के जइसे काज।। बास हावय कण कण मा तोर। पाय नही प्रभु तोरे छोर।।(02) ------------------------------------ अजर अमर के वर ला पाय। राम दूत सेवक कहलाय।। पार करे सौ जोजन दूर। थर थर कापै देख असुर।।(03) ------------------------------------- सागर लांघे प्रभु के काज। संकट हरले हमरो आज।। धन हे धन हे अंजन पूत। मार भगाए दानव भूत।।(04) ------------------------------------ सुमर सुमर के प्रभु के नाँव। तारे परबत रख के पाँव।। नाम सजीवन हावय तोर। अंधियारी म कर अंजोर।।(05) ------------------------------------- ज्वाला प्रसाद कश्यप शिक्षक L.B. शा.पूर्व माध्य.शाला-झझपुरी खुर्द मुंगेली (छ.ग.)8770734890