होली पर दोहे
होली के इस पर्व में होली के इस पर्व में,चलो करें दो काम। पेड़ कटाई रोक कर,दें खुशियाँ पैगाम।। उस माता से पूछिए,क्या है रंग ग़ुलाल। बेटा जिसने खो दिया, सरहद में इस साल।। होली ने अवसर दिए,चलो भूलें हम बैर। बच्चों को हम स्नेह दें, बड़ों के छूँले पैर।। जाति-धर्म के आग में,धधक रहा संसार। प्रेम-भाव के मंत्र से,भर दें सकल दरार।। होली पावन प्रेम से, चलो मिलाएं हाथ। दो दिन की है जिंदगी, क्या जाएगा साथ।। रंगों के त्यौहार में,खोज रहा हूँ रंग। पानी में जो ना धुले,रहे उमर भर संग।। चलो जलाएं होलिका,डालें दोष विकार। बैर न आवे पास मे, यही पर्व का सार।। ज्वाला प्रसाद कश्यप