झड़ी होगय

बिन बादर के झड़ी होगय। करगा निकल गे,धान ह तरी होगय ।। गंगा निरमल गंगा,आज मतलागे, बोतल के पानी फरी होगय।। गाय के सजा होगय,बघवा संग लड़ई मा, बघवा सबो ड़हर ले बरी होगय।। टंगिया तलवार के लड़ई म,हंवव गवाही, कति बोलंव बीच म मोर नरी होगय।। सुखाए रुख ल हरियर करेंव पानी डार के, तेखर सेती हाँथ म हंथखड़ी होगय।। ज्वाला प्रसाद कश्यप (शिक्षक L.B.) भठली कला ,मुंगेली छ,ग, 8770734890,7566498583

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