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छत्तीसगढ़ी कविता

* ओखरे शरण मा * ओखरे शरण मा जाके पूछव, जेन ह जग ला पालत हे। मोर तीर झन आके पूछव, काबर धरती हालत हे।। टोपा बांध के बइठे हे, लूको के अपन आँखी । सब के करनी कहाँ जाही, हावय सुरुज ह साखी।। ...