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छत्तीसगढ़ी कविता

छत्तीसगढ़ी कविता ------------------------------------ धरती के छाती म जनम ले हँव, मोर भार ह एला हरू हावय। ए करिया बादर बता ना, तोला काबर गरू हावय।। - करथे ए हमला दुलार, दे हावय जग ला जनम। का जानबे तै बाँझ बैरी, का...

ज्वाला के दोहे

----- दोहे------- आखर आखर जोड़ के,भाव ल अंतस घोर। देबे ध्यान विधान मा,करहि जगत अंजोर।।(01) ज्वाला किमती ज्ञान हे,खोज खोज के जोर। मनखे मनखे बाँट तै,जाके घर अउ खोर।।(02) सुख जा आबे बाद मा,दुख जाए ...