कविता

* संगी आतो गांवे म * ------------------------------- संगी आतो गांवे म,खेलब आज होली । तन सिंगारे हे बसंत,निक लगे मीठ बोली।। रिगबिग दिखे गली खोर,रंगीन दिखे बाग़ । मन बैरी ह झूमें हे, कोयली धरे हे राग ।। लईका सियानी सबो ,धरे हे पिचकारी। पनिहारिन के गोठ हे ,करे जम के चारी।। गली खोर फ़ाग गूँजे, लइका बूढ़ा संग। हाँथ म पिचकारी धरे,लाली पिवरा रंग।। ज्वाला प्रसाद कश्यप ( शिक्षक) भठली कला,झझपुरी खुर्द मुंगेली 8770734890

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