कविता
* संगी आतो गांवे म *
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संगी आतो गांवे म,खेलब आज होली ।
तन सिंगारे हे बसंत,निक लगे मीठ बोली।।
रिगबिग दिखे गली खोर,रंगीन दिखे बाग़ ।
मन बैरी ह झूमें हे, कोयली धरे हे राग ।।
लईका सियानी सबो ,धरे हे पिचकारी।
पनिहारिन के गोठ हे ,करे जम के चारी।।
गली खोर फ़ाग गूँजे, लइका बूढ़ा संग।
हाँथ म पिचकारी धरे,लाली पिवरा रंग।।
ज्वाला प्रसाद कश्यप
( शिक्षक)
भठली कला,झझपुरी खुर्द
मुंगेली 8770734890
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