छंद
*श्री हनुमान जी वंदना*
जयकारी/चौपई छंद
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नती सुनले नाथ हमार।
संकट मोचन पवन कुमार।।
बंदन हे बंदन हे रंग।
चुपरे बंदन पूरा अंग।। (01)
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आके रख भक्तन के लाज।
करे राम के जइसे काज।।
बास हावय कण कण मा तोर।
पाय नही प्रभु तोरे छोर।।(02)
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अजर अमर के वर ला पाय।
राम दूत सेवक कहलाय।।
पार करे सौ जोजन दूर।
थर थर कापै देख असुर।।(03)
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सागर लांघे प्रभु के काज।
संकट हरले हमरो आज।।
धन हे धन हे अंजन पूत।
मार भगाए दानव भूत।।(04)
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सुमर सुमर के प्रभु के नाँव।
तारे परबत रख के पाँव।।
नाम सजीवन हावय तोर।
अंधियारी म कर अंजोर।।(05)
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ज्वाला प्रसाद कश्यप
शिक्षक L.B.
शा.पूर्व माध्य.शाला-झझपुरी खुर्द
मुंगेली (छ.ग.)8770734890
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