कविता

*आज के तुलसी दास*
बरसत पानी कड़कत बिजली,
आधा     रात   चउमास के।
रत्नावली   ह   देखिच,
चाल ल तुलसी दास के।।(1)
हे पति  हे स्वामी,
तोर मया ह का काम के।
ए नरक ले तर जाबे, 
नाम लेबे त श्री राम के।।(2) 
तुलसी के बुखार उतरगे,
रत्ना के सुन के बोली।
उमर भर के बीमारी ले,
तुलसी ह पागे राम के गोली।(3)
राम ल पाए बर रत्ना ह,
बनगे तुलसी के गुरु।
घर ले बाहिर निकल के,
रामायण लिखे  करिच शुरू।(4)
आज के रत्ना ह
समझाथे तुलसी दास ल।
धरती म बईठ के
अमरथे अकास ल।।(5)
रत्ना ह ठंडा होथे,
तुलसी ह गरम होथे।
रत्ना बर तुलसी के मन म
बड़ भरम होथे।।(6)
रत्ना ह थाना म
करथे शिकायत पेस।
तुलसी दास बर
लग जाथे दहेज के केस।(7)
रत्ना तुलसी दुनो झन
जमाथे अब्बड़ धाक।
आखिर म एक दूसर के,
हो जाथे तलाक।।(8)
नारी के आरक्षण ल
झन समझबे खेल।
ओ तुलसी ह राम ल पागे
तोला भेजत हाँवव जेल।।(09)
जेल घर के आगी म,
चाउर दार सही चुरबे।
ओ समय के तुलसी म
अरे पगला तैहा कहाँ पुरबे।।(10)
       *ज्वाला प्रसाद कश्यप*
        *भठली कला(मुंगेली)*
          *8770734890*

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