ज्वाला के दोहे

----- दोहे-------
आखर आखर जोड़ के,भाव ल अंतस घोर।
देबे ध्यान विधान मा,करहि जगत अंजोर।।(01)
ज्वाला किमती ज्ञान हे,खोज खोज के जोर।
मनखे मनखे बाँट तै,जाके घर अउ खोर।।(02)
सुख जा आबे बाद मा,दुख जाए के बाद।
अपन कोन संसार मा, आहय मोला याद।। (03)
सपना देखव जाग के,ओला करम उतार।
पूरा होही सोंच हा,करम जगत आधार।।(04)
गुरतुर गुरतुर बोल के,दुनियाँ ला तै बांध।
कोरा होही दाग हा,बैरी देही कांध ।।(05)
ज्वाला प्रसाद कश्यप
ग्रा.-भठली कला (मुंगेली)
फोन नं.8770734890

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