होली के इस पर्व में होली के इस पर्व में,चलो करें दो काम। पेड़ कटाई रोक कर,दें खुशियाँ पैगाम।। उस माता से पूछिए,क्या है रंग ग़ुलाल। बेटा जिसने खो दिया, सरहद में इस साल।। होली ने अवसर दिए,चलो भूलें हम बैर। बच्चों को हम स्नेह दें, बड़ों के छूँले पैर।। जाति-धर्म के आग में,धधक रहा संसार। प्रेम-भाव के मंत्र से,भर दें सकल दरार।। होली पावन प्रेम से, चलो मिलाएं हाथ। दो दिन की है जिंदगी, क्या जाएगा साथ।। रंगों के त्यौहार में,खोज रहा हूँ रंग। पानी में जो ना धुले,रहे उमर भर संग।। चलो जलाएं होलिका,डालें दोष विकार। बैर न आवे पास मे, यही पर्व का सार।। ज्वाला प्रसाद कश्यप
छत्तीसगढ़ी कविता ------------------------------------ धरती के छाती म जनम ले हँव, मोर भार ह एला हरू हावय। ए करिया बादर बता ना, तोला काबर गरू हावय।। -करथे ए हमला दुलार, दे हावय जग ला जनम। का जानबे तै बाँझ बैरी,...
*मौलिक दोहा छंद* *सर्वाधिकार सुरक्षित@* विद्या विमल वसुंधरा,वासर वर व्यवहार। व्यापक विजय वरीयता,सुन्दर सुखद विचार।। शिक्षा रत्न अमूल्य है,सृष्टि का है सार। गहराई जितनी मिले, निकले उतनी धार।। शिक्षा अचल है संपदा ,खर्च में गुणज होय। जो इसको अर्जित करे,पार न पावे कोय।। शिक्षा प्रगति का मूल है,अज्ञानता हो दूर। मूरख किश्मत दोष दे, खोजे लाख कसूर।। विद्या की जब आस हो, बाढ़े शुद्ध विचार। अपनी मेहनत का सदा,है बढ़िया उपहार।। अनुशासन में नित रहे,विद्या की हो आस। मन मंदिर विद्या भरे,होवे चहूँ विकास।। विद्या धन का स्रोत है,करे सदा अभ्यास। अज्ञानता छूवे नही, उजियारा हो पास।। मन को जो शीतल करे, ज्ञान का हो भंडार। विद्या से गुणवान हो, करे विश्व संचार।। शिक्षा ब्यापक है सखे , सीमा अनंत अछेद। देखो वैदिक काल से, अभिन्न बखाने वेद।। नैन खुले जब प्रात को,देना शुद्ध विचार। हम बच्चों की आस को,करना प्रभु साकार।। सदा नियम से हम बँधें,जग के पालन हार। उर आलोकित कीजिए, हो विद्या विस्तार ।। ज्वाला कश्यप शा.पू.माध्य.शाला झझपुरी खुर्द ...
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